March 1, 2010 2:37 PM
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कविता

प्रवासी साहित्यकारों के प्रतिनिधि दाऊजी गुप्त मुंबई में

    सत्रह अप्रैल २०१०   की बात है जब देवी नागरानी जी के मोबाइल फोन की घंटी बजी. " मैं दाऊजी गुप्त बोल रहा हूँ लखनऊ से , कल मुंबई पहुंच रहा हूँ ." देवी जी ने क्षण भर को सोचा और ख़ुशी से बोलीं.." आपका स्वागत है हमारी महानगरी में . " और बातों के सिलसिले में यह तय हुआ कि सुनने सुनाने के सिलसिले को एक काव्य गोष्टी के स्वरूप दिया जाय ताकि कुछ मिलने मिलाने का भी लाभ मिले" देवी जी जानतीं हैं के दाऊजी जो खुद बेहतरीन कवि हैं को कवितायेँ ग़ज़लें सुनने का कितना शौक है , लेकिन इतने कम समय में कौन आ पायेगा उनके यहाँ ये सोचनीय प्रश्न था. उन्होंने कहा " दाऊजी आपका स्वागत है लेकिन मुझे ये सब प्रबंध करने में समय लगेगा आप अगर अनुमति दें तो ये नाशिश्त्त मंगल वार २० मंगलवार को रख लें." इस तरह मंगल वार की शाम पांच बजे देवी नागरानी जी के घर पर एक काव्य गोष्ठी रखने का कार्यक्रम पक्का हो गया.

      जो लोग देवी जी को जानते हैं उन्हें उनकी कर्मठता और कार्य क्षमताओं का पूरा अंदाज़ा है , बहुत मुश्किल लगने वाले काम को वो आसानी से कर दिखाती हैं. एक बार वो जिस काम को करने का बीड़ा उठा लेती हैं उसके बाद उसे पूरा कर के ही सांस लेती हैं. अकेली होने के बावजूद वो कभी अपने आपको अकेला या असहाय नहीं पातीं. उनका ये गुण अनुकरणीय है. दाऊजी से बात करने के पश्चात उन्होंने बिना समय गंवाये मुंबई के काव्य रसिकों शायरों की एक लिस्ट तैयार की और फिर उसके अनुसार एक एक को फोन करने में जुट गयीं. तीन घंटे की लगातार हो रही फोन काल्स के बाद कई जाने माने शायर मंगलवार की शाम उनके घर पर पधारे.

      मंगलवार बीस अप्रेल को देवी जी घर सब से पहले पहुँचने वाले दाउजी गुप्त ही थे. पाँच बजे की तपती शाम में देवी जी के घर पहुँच कर दाउजी ने अपने काव्य प्रेम को दर्शा दिया. एक एक कर काव्य प्रेमी आने लगे. पिंगलाचार्य श्री महर्षि जी , जानी मानी कव्यित्री माया गोविन्द और उनके अद्भुत शायर पति राम गोविन्द , हरदिल अज़ीज़ शायर जनाब खन्ना मुज्ज़फ़री , मधुर कविताओं के रचयिता कुमार शैलेन्द्र , ' कुतुबनुमा ' पत्रिका के माध्यम से हिंदी की पताका फहराने वाली संपादक डा. राजम नटराजन पिल्ले , अपनी ग़ज़लों से सबके दिलों पर छाने वाले शायर जनाब सागर त्रिपाठी , सौम्य प्रकृति के अनूठे शायर जनाब हस्ती मल हस्ती , ' क़ुतुबनुमा ' के संपादक मंडल और अनेकों संस्थाओं से जुड़े श्री अलोक भट्टाचार्य , नारी शक्ति की प्रतीक कव्यित्री नीलिमा दुबे ,   सुरीले शायर हस्तीमल मल हस्ती ', प्रो॰रत्ना झा , खोपोली के शायर नीरज गोस्वामी , रास बिहारी पाण्डेय , आशु कवि श्यामकुमार श्याम , अपनी विशिष्ट शैली से चमत्कृत करने वाले कवि , शायर श्री लक्षमण डुबे , आर . डी . नैशनल कालेज की हिंदी विभाग की अध्यक्षा डा॰ संगीता सहजवानी और   जाने माने कवि , शायर , ओर मँच संचालक देव मणि पांडेय मौजूद थे , जिन्होंने सहर्ष कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेवारी भी संभाली. शायर जनाब खन्ना मुज्ज़फ़री अध्तक्षता के पद पर आसीन हुए , श्ड़ी महरिष जी एवं दाऊजी गुप्त , माया गोविंद मुख्य महमान रह