गाजीपुर/बलिया। पूर्वांचल के विकास को नई रफ्तार देने के साथ-साथ अब पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण के लिए एक बेहद अनूठी और क्रांतिकारी पहल...
गाजीपुर/बलिया। पूर्वांचल के विकास को नई रफ्तार देने के साथ-साथ अब पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण के लिए एक बेहद अनूठी और क्रांतिकारी पहल शुरू की गई है। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित 42.5 किलोमीटर लंबे 'गाजीपुर-बलिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे' (Ghazipur-Ballia Greenfield Expressway) पर 11.5 किलोमीटर लंबा एक विशेष "बी कॉरिडोर" (Bee Corridor) विकसित किया जाएगा।
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| Purvanchal Samachar |
इस अभिनव परियोजना का मुख्य उद्देश्य तेज़ी से घट रही मधुमक्खियों की आबादी का संरक्षण करना, उनका प्राकृतिक आवास बहाल करना और क्षेत्र में वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना है। इस कॉरिडोर के निर्माण और रखरखाव को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और उत्तर प्रदेश वन विभाग के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर औपचारिक हस्ताक्षर किए गए हैं।
वाराणसी वृत्त के वन संरक्षक डॉ. रवि कुमार सिंह ने इस अनूठी योजना की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि 'बी कॉरिडोर' को आकार देने के लिए एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों (सर्विस लेन के पास) और बीच के डिवाइडर (मीडियन) पर विशेष प्रजाति के पौधे रोपे जाएंगे। ये पौधे मुख्य रूप से अत्यधिक मकरंद (नेक्टर) और सुगंधित फूलों से भरपूर होंगे, जो मधुमक्खियों को अपनी ओर आकर्षित करेंगे। इस कॉरिडोर में मुख्य रूप से नीम, करंज, महुआ, पलाश, जामुन और सिरिस जैसे समृद्ध देशी व फूलदार वृक्ष लगाए जाएंगे, जिससे हर मौसम में मधुमक्खियों को प्रचुर मात्रा में भोजन और सुरक्षित प्राकृतिक आवास उपलब्ध हो सके।
हर 500 मीटर पर लगेंगे फूलदार पौधों के क्लस्टर वन अधिकारियों के अनुसार, मधुमक्खियों की भोजन (मकरंद) तलाशने की स्वाभाविक क्षमता को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे के इस 11.5 किलोमीटर के दायरे में प्रत्येक 500 मीटर से 1 किलोमीटर की दूरी पर फूलदार पौधों और झाड़ियों के विशेष समूह (क्लस्टर) लगाए जाएंगे। इससे मधुमक्खियां आकर्षित होंगी और उन्हें भोजन के लिए अपने प्राकृतिक आवास से दूर नहीं भटकना पड़ेगा। एनएचएआई और वन विभाग ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर संयुक्त रूप से धरातल पर काम शुरू कर दिया है। वन अधिकारियों का दावा है कि आगामी 6 से 7 महीनों के भीतर एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा पूरी तरह हरा-भरा नजर आने लगेगा और बी कॉरिडोर अपना पूर्ण आकार ले लेगा।
शहरीकरण से घटती आबादी पर लगेगी रोक, किसानों की बढ़ेगी पैदावार गाजीपुर के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि अनियंत्रित शहरीकरण, वनों की कटाई और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग के कारण मधुमक्खियों की संख्या में लगातार खतरनाक गिरावट दर्ज की जा रही है। इसका सीधा और प्रतिकूल असर प्राकृतिक परागण (पॉलिनेशन) और कृषि उपज पर पड़ रहा है। इस 'बी कॉरिडोर' के माध्यम से जब मधुमक्खियों का प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) दोबारा विकसित होगा, तो आसपास के ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में फसलों के परागण की दर में भारी वृद्धि होगी। प्राकृतिक परागण बढ़ने से गाजीपुर और बलिया के स्थानीय किसानों की फसलों की पैदावार और गुणवत्ता में जबरदस्त सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
