गाजीपुर। जनपद में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के छह साल पुराने गंभीर मामले में अदालत ने एक सख्त और नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। विशे...
गाजीपुर। जनपद में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के छह साल पुराने गंभीर मामले में अदालत ने एक सख्त और नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो प्रथम) रामअवतार प्रसाद की अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करते हुए अभियुक्त मोहम्मद शमशाद को दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की कठोर सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 1.50 लाख रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है। अदालत ने अपने ऐतिहासिक आदेश में यह भी निर्देश दिया है कि जुर्माने की कुल राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिया जाएगा। फैसला सुनाए जाने के बाद दोषी को न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया गया।
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| Purvanchal Samachar |
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 4 मई 2018 की है। भांवरकोल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने पुलिस को लिखित तहरीर देकर सूचना दी थी कि उनकी नाबालिग पुत्री शाम करीब 4 बजे अचानक घर से लापता हो गई है। परिजनों द्वारा रिश्तेदारों और आसपास काफी खोजबीन की गई। इसी दौरान पीड़िता की चचेरी बहन ने परिजनों को बताया कि उसने लड़की को मोहम्मद शमशाद के साथ बक्सर (बिहार) रेलवे स्टेशन पर देखा था।
बक्सर से हुई थी बरामदगी, पुलिस ने दाखिल किया था चार्जशीट परिजनों की तहरीर के आधार पर भांवरकोल थाना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बड़ी नगला, थाना मालसलामी, जिला पटना (बिहार) निवासी अभियुक्त मोहम्मद शमशाद के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने त्वरित दबिश देकर पीड़िता को सकुशल बरामद किया और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण (मेडिकल) कराने के साथ ही अदालत में बयान दर्ज कराए और साक्ष्य संकलन के बाद समयबद्ध तरीके से न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया।
8 गवाहों की गवाही और साक्ष्यों के आधार पर सजा मुकदमे के विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए सहायक शासकीय अधिवक्ता रामकुमार राय और सुनील सिंह ने अदालत के समक्ष कुल आठ महत्वपूर्ण गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलों, गवाहों के बयानों और पत्रावली पर उपलब्ध वैज्ञानिक व दस्तावेजी साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के बाद विशेष न्यायाधीश रामअवतार प्रसाद की अदालत ने मोहम्मद शमशाद को दोषसिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
