गाजीपुर। जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था किस कदर वेंटिलेटर पर है, इसकी एक रूहानी मिसाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कासिमाबाद में देखने क...
गाजीपुर। जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था किस कदर वेंटिलेटर पर है, इसकी एक रूहानी मिसाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कासिमाबाद में देखने को मिली है। यहाँ के डॉक्टरों ने एक गर्भवती महिला का सिजेरियन ऑपरेशन तो कर दिया, लेकिन लापरवाही की सारी हदें पार करते हुए पेट के भीतर बैंडेज (पट्टी) ही छोड़ दिया।
डेढ़ महीने तक असहनीय दर्द और सड़न से जूझ रही महिला की जान वाराणसी के डॉक्टरों ने दोबारा सर्जरी कर बचाई है।
सर्जरी के बाद 'नासूर' बना जख्म, अल्ट्रासाउंड ने खोली पोल
बरेसर थाना क्षेत्र के बदरपुर चांद गांव निवासी नीतीश कुमार ने बताया कि उनकी बहन इंद्रकला देवी का बीते 29 दिसंबर को सीएचसी में सिजेरियन प्रसव हुआ था। छुट्टी मिलने के कुछ दिन बाद ही टांकों वाली जगह पर असहनीय दर्द शुरू हो गया और वहां से मवाद (पस) निकलने लगा। स्थानीय स्तर पर आराम न मिलने पर परिजन उसे वाराणसी के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां जब डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड किया, तो वे भी दंग रह गए—इंद्रकला के पेट के भीतर सर्जरी के दौरान इस्तेमाल किया जाने वाला बैंडेज पड़ा हुआ था, जिससे अंदरूनी अंगों में संक्रमण फैल रहा था।
दोबारा हुई सर्जरी, मौत से जंग लड़ रही प्रसूता
बीते 9 फरवरी को वाराणसी में डॉक्टरों ने दोबारा सर्जरी कर उस सड़े हुए बैंडेज को बाहर निकाला। फिलहाल प्रसूता की हालत नाजुक बनी हुई है और वह अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। इस लापरवाही ने न केवल एक गरीब परिवार को आर्थिक रूप से तोड़ दिया है, बल्कि सरकारी अस्पतालों के प्रति भरोसे को भी लहूलुहान कर दिया है।
