गाजीपुर (ब्यूरो)। आजादी के सात दशक बाद भी जिस मगई नदी पर सरकारी फाइलें धूल फांकती रहीं, वहां ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर 105 फीट लंबा पक्का पु...
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| Purvanchal Samachar |
फौजी के 10 लाख और जनता के जज्बे ने बदली सूरत
इस ऐतिहासिक पहल की नींव सेना से सेवानिवृत्त जवान रविंद्र यादव ने अपने निजी कोष से 10 लाख रुपये देकर रखी थी। देखते ही देखते कारवां बनता गया और इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने 25 फरवरी 2024 को इसका शिलान्यास किया। सेना के ही रिटायर्ड इंजीनियरिंग कोर के विशेषज्ञों की देखरेख में तैयार यह पुल तकनीकी रूप से भी बेजोड़ है। राजकुमार पांडेय ने ग्रामीणों के इस भगीरथ प्रयास की सराहना करते हुए इसे जनहित का सबसे बड़ा उदाहरण बताया।
बांस के पुल और 15 किमी के चक्कर से मिलेगी मुक्ति
हैरानी की बात है कि जो थाना महज 3 किलोमीटर दूर था, वहां पहुंचने के लिए ग्रामीणों को 15 किलोमीटर की दूरी नापनी पड़ती थी। बाढ़ के दिनों में बांस के चचरे और नाव ही एकमात्र सहारा थे। इस पुल के चालू होते ही जिला मुख्यालय की दूरी 10-12 किलोमीटर कम हो जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि नेताओं और अफसरों की चौखट घिसने के बजाय खुद फावड़ा उठाना ही सबसे सही फैसला साबित हुआ।
