वाराणसी। कैंपस संस्कृति के विकास को लेकर उत्तर प्रदेश स्टेट डेटा सेंटर (UPSDC) द्वारा शुक्रवार की रात जारी की गई 44 मानकों पर आधारित 'प्...
वाराणसी। कैंपस संस्कृति के विकास को लेकर उत्तर प्रदेश स्टेट डेटा सेंटर (UPSDC) द्वारा शुक्रवार की रात जारी की गई 44 मानकों पर आधारित 'प्रमाण पोर्टल' की ताजा रैंकिंग में वाराणसी के उदय प्रताप स्वायत्तशासी कॉलेज (यूपी कॉलेज) ने एक बार फिर सफलता का परचम लहराया है। यूपी कॉलेज ने शानदार 76.33 अंक हासिल कर पूरे उत्तर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है।
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| Purvanchal Samachar |
लगातार तीसरी बार हासिल किया शीर्ष स्थान
यूपी कॉलेज ने प्रमाण पोर्टल की रैंकिंग में लगातार तीसरी बार प्रदेश में टॉप कर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता को साबित किया है। महाविद्यालय को एकेडमिक टाइम टेबल का पालन, समय से परीक्षा व परीक्षा परिणाम की घोषणा, स्कॉलरशिप वितरण, सोशल मीडिया एंगेजमेंट और ग्रीन कैंपस जैसे मानकों पर बेहतरीन प्रदर्शन के चलते शीर्ष स्थान मिला है। हालांकि, प्लेसमेंट, इंडस्ट्री-एकेडमिक सहयोग, रिसर्च प्रोजेक्ट, पेटेंट और वर्चुअल लैब जैसे क्षेत्रों में कॉलेज को अभी और सुधार करने की आवश्यकता है।
गोरखपुर दूसरे और कानपुर तीसरे स्थान पर
रैंकिंग में यूपी कॉलेज के बाद गोरखपुर का उदयनाथ पीजी कॉलेज 73.40 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर और कानपुर का पीएन कॉलेज 67.88 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। दूसरी ओर, यदि पूरे प्रदेश के औसत स्कोर की बात करें तो यह महज 33.59 अंक रहा, जो उत्तर प्रदेश के कई महाविद्यालयों की बुनियादी कमियों को उजागर करता है।
जहाँ एक तरफ यूपी कॉलेज ने व्यक्तिगत रूप से टॉप किया है, वहीं जिलावार रैंकिंग में लखनऊ को प्रदेश भर में प्रथम स्थान मिला है, अलीगढ़ ने दूसरा, मिर्जापुर ने तीसरा, मेरठ ने चौथा, चित्रकूट ने पांचवां, कानपुर ने छठवां और गोरखपुर ने सातवां स्थान और वाराणसी आठवां स्थान मिला है, जो दर्शाता है कि जिले के अन्य महाविद्यालयों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।
प्राचार्य ने शिक्षकों और छात्रों को दिया श्रेय
यूपी कॉलेज के प्रथम आने पर हर्ष व्यक्त करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय संस्थान के कर्मठ शिक्षकों, कर्मचारियों और प्रतिभावान छात्रों को दिया। उन्होंने कहा, "प्रमाण पोर्टल ने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही की एक नई संस्कृति को जन्म दिया है। अब सभी संस्थान नियमित रूप से अपनी उपलब्धियों और कमियों का स्व-आकलन कर डिजिटल सुधार की ओर बढ़ रहे हैं।
