गाजीपुर। जनपद के शहर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत संचालित दो बड़े होटलों— 'हॉटेल सिटी रूम्स' और 'होटल देव इंटरनेशनल' के खिलाफ ...
गाजीपुर। जनपद के शहर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत संचालित दो बड़े होटलों— 'हॉटेल सिटी रूम्स' और 'होटल देव इंटरनेशनल' के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं और संदिग्ध गतिविधियों के आरोपों को लेकर सोमवार को छात्र नेताओं के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी (DM) अनुपम शुक्ल से कलेक्टेड़ सभागार में मुलाकात की। छात्र नेता डॉ. शम्मी सिंह के मजबूत नेतृत्व में पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को एक विस्तृत मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपकर दोनों होटलों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से शशांक उपाध्याय, अभिषेक राय और दीपक उपाध्याय ‘कान्हा’ सहित दर्जनों छात्र नेता मौजूद रहे।
जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में छात्र नेताओं ने बेहद संगीन और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि स्टेशन रोड स्थित 'होटल देव इंटरनेशनल' के मुख्य संचालक पंकज दुबे के खिलाफ पूर्व से ही विभिन्न थानों में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि उक्त होटल के भौतिक निर्माण और संचालन में विकास प्राधिकरण के नक्शे संबंधी नियमों की घोर अवहेलना व अनियमितताएं की गई हैं। इसके अलावा, इस होटल परिसर में लंबे समय से विभिन्न प्रकार की संदिग्ध और अनैतिक गतिविधियों के संचालित होने की शिकायतें स्थानीय नागरिकों द्वारा पूर्व में भी कई बार उठाई जा चुकी हैं।
गैंगस्टर एक्ट और धारा 307 के तहत दर्ज हैं मुकदमे
छात्र नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया कि पूर्व में दिल्ली की एक युवती से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में गहन जांच के बाद इस होटल प्रबंधन के खिलाफ शहर कोतवाली में बकायदा प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की जा चुकी है। छात्र नेता दीपक उपाध्याय 'कान्हा' और अन्य सदस्यों ने सार्वजनिक आरोप लगाया कि होटल देव इंटरनेशनल के संचालक का पुराना आपराधिक इतिहास है और उसके खिलाफ धारा 307 (जानलेवा हमला) तथा उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट जैसी संगीन धाराओं के तहत मुकदमे कोर्ट में विचाराधीन हैं।
छात्र नेताओं पर दर्ज फर्जी मुकदमों को वापस लेने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने होटल संचालकों और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भी कोई सामाजिक कार्यकर्ता या छात्र नेता इन संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ सामाजिक सरोकारों के तहत आवाज उठाता है, तो उसे दबाने और डराने की नियत से होटल संचालकों द्वारा धनबल के प्रयोग से शहर कोतवाली में पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत मुकदमे दर्ज करवा दिए जाते हैं। इन फर्जी मुकदमों के सहारे छात्र नेताओं और समाजसेवियों को मानसिक, सामाजिक और कानूनी रूप से बुरी तरह प्रताड़ित किया जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुख्य रूप से दो मांगें रखीं; पहला— सामाजिक आवाज उठाने वाले छात्र नेताओं पर दर्ज किए गए सभी मुकदमों की किसी उच्च अधिकारी से निष्पक्ष समीक्षा कराकर उन्हें तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, और दूसरा— दोनों होटलों की फायर, नक्शा और सुरक्षा मानकों के आधार पर विस्तृत जांच कर विधिक कार्रवाई की जाए। इस पूरे मामले को गंभीरता से सुनते हुए जिलाधिकारी अनुपम शुक्ल ने छात्र नेताओं को आश्वस्त किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, मामले की पूरी निष्पक्षता से जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर न्यायसंगत उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
