वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रेलवे प्रशासन द्वारा एक मस्जिद पर बेदखली या अतिक्रमण संबंधी नोटिस चस्पा किए जाने के बाद स्थानीय मुस्लिम...
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रेलवे प्रशासन द्वारा एक मस्जिद पर बेदखली या अतिक्रमण संबंधी नोटिस चस्पा किए जाने के बाद स्थानीय मुस्लिम समाज में अचानक हड़कंप मच गया है। यह पूरा मामला कैंट रेलवे स्टेशन के समीप स्थित ऐतिहासिक गंज शाहिदा मस्जिद से जुड़ा है। रेलवे के इस कड़े कदम के जवाब में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने भी तत्परता दिखाते हुए मस्जिद के मुख्य द्वार पर अपना एक जवाबी नोटिस (पलटवार नोटिस) चस्पा कर दिया है। अंजुमन इंतजामिया ने अपने आधिकारिक नोटिस में इस पूरी मस्जिद और संबंधित परिसर को मुस्लिम समाज की वैध मिल्कियत (संपत्ति) घोषित करते हुए रेलवे के नोटिस को पूरी तरह फर्जी और बेबुनियाद करार दिया है। इस विवाद के बीच अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव मोहम्मद सैयद यासीन ने इस प्रशासनिक कार्रवाई के कारण शहर की कानून-व्यवस्था बिगड़ने तक की बड़ी चेतावनी दे डाली है।
गंज शाहिदा मस्जिद के मुख्य प्रवेश द्वार पर दोनों पक्षों के नोटिस चस्पा होने के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। मामले पर अपना कड़ा पक्ष रखते हुए अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव मोहम्मद सैयद यासीन ने मीडिया से बातचीत में रेलवे की इस कार्रवाई को पूरी तरह से अवैध और नियम विरुद्ध बताया। उन्होंने तकनीकी खामियां उजागर करते हुए दावा किया कि रेलवे द्वारा जो नोटिस चस्पा किया गया है, उस पर न तो कोई आधिकारिक तारीख (डेट) अंकित है और न ही किसी सक्षम अधिकारी के दस्तखत (हस्ताक्षर) मौजूद हैं। इतना ही नहीं, उस पत्र पर रेलवे विभाग का कोई आधिकारिक लोगो या मुहर भी नहीं है। यासीन ने आरोप लगाया कि बिना किसी पहचान के इस तरह का नोटिस चिपकाकर रेलवे खुद शहर की शांति और कानून-व्यवस्था को जानबूझकर बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।
अंजुमन सचिव का दावा— पुराने मुकदमे का गलत हवाला दे रहा रेलवे
अंजुमन इंतजामिया के संयुक्त सचिव मोहम्मद सैयद यासीन ने कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए स्पष्ट किया कि रेलवे के इस कथित नोटिस में जिस पुराने मुकदमे (कोर्ट केस) का जिक्र किया गया है, वह असल में इस मस्जिद की मुख्य इमारत के लिए था ही नहीं। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्य साझा करते हुए दावा किया कि वह मुकदमा मस्जिद के पूर्व दिशा में स्थित एक खाली जमीन के टुकड़े को लेकर था, न कि मुख्य मस्जिद के ढांचे को लेकर। अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने वह केस बहुत पहले केवल जमीन की सुरक्षा के मद्देनजर दाखिल किया था। कमेटी ने दोटूक कहा है कि गंज शाहिदा मस्जिद मुस्लिम वक्फ की संपत्ति है और इसके अस्तित्व के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या प्रशासनिक तानाशाही को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। फिलहाल इस संवेदनशील धार्मिक व प्रशासनिक जमीन विवाद पर रेलवे के उच्चाधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
