वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के हेलीपैड मैदान में शनिवार से दो दिवसीय भव्य ग्रामीण उत्सव ‘रंगीलो काशी’ का शानदार आगाज हुआ। 19 और ...
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के हेलीपैड मैदान में शनिवार से दो दिवसीय भव्य ग्रामीण उत्सव ‘रंगीलो काशी’ का शानदार आगाज हुआ। 19 और 20 सितंबर तक आयोजित इस उत्सव में पूर्वांचल की ग्रामीण डेयरी अर्थव्यवस्था और आधुनिक पशुपालन की अनूठी तस्वीर देखने को मिली। उत्सव के मुख्य आकर्षण ‘नंदी शो’ में हरियाणा के जींद से आई तीन वर्षीय गाय 'आराधिका' को देखने के लिए पशुपालकों और आम दर्शकों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा।
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| Purvanchal Samachar |
हरियाणा की 3 साल की 'आराधिका' ने खींचा ध्यान
जींद (हरियाणा) से पहुंचे पशुपालक बिट्टू ने बताया कि उनकी तीन साल की गाय 'आराधिका' घर पर रोजाना करीब 27 लीटर दूध देती है। हालांकि, लंबी दूरी की यात्रा और सफर की थकान के कारण प्रदर्शनी स्थल पर उसने 22 लीटर दूध दिया, जो उपस्थित पशुपालकों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
मैदान में जुटे सैकड़ों किसान और पशुपालक उन्नत नस्ल सुधार, दूध उत्पादन बढ़ाने और पशु आहार प्रबंधन के जरिए लागत कम करने के आधुनिक गुर सीखने में उत्सुक दिखे। वहीं, बड़ी संख्या में पहुंची ग्रामीण महिलाएं रोजाना दूध उत्पादन से घरेलू आय बढ़ाने के तरीकों की जानकारी लेती नजर आईं।
हर जिले में बनेगी डेयरी सहकारी समिति: आयुक्त धनलक्ष्मी के.
उत्सव के दौरान आयोजित तकनीकी सत्र में डेयरी विकास आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने शिरकत की। उन्होंने पशुपालकों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य हर जिले में सुदृढ़ डेयरी सहकारी समितियां गठित करना है।
उन्होंने बताया कि ब्लॉक स्तर पर 'राष्ट्रीय गोकुल मिशन' को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि छोटे और सीमांत पशुपालकों को बिचौलियों से मुक्ति मिले और उन्हें संगठित डेयरी बाजार व उचित मूल्य का सीधा लाभ प्राप्त हो सके।
होनहार बच्चे और लाभार्थी हुए सम्मानित, लगे आधुनिक स्टॉल
समारोह के दौरान डेयरी विकास विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं के सफल लाभार्थियों और किसानों के मेधावी बच्चों को मंच से सम्मानित किया गया।
उत्सव परिसर में कृषि संस्थानों, एग्री-डेयरी स्टार्टअप्स, सहकारी समितियों और सरकारी विभागों द्वारा आधुनिक डेयरी उपकरणों, उन्नत चारे की किस्मों और वैज्ञानिक पशुपालन के समाधानों पर आधारित आकर्षक स्टॉल व प्रैक्टिकल डेमो लगाए गए हैं, जिनका लाभ पूर्वांचल भर से आए किसान उठा रहे हैं।
