Ghazipur News: जिला शुल्क नियामक समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को जिलाधिकारी महोदय की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में उत्तर प्रदेश...
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| Purvanchal Samachar |
बैठक में बताया गया कि प्रत्येक स्कूल को अपना फीस स्ट्रक्चर स्वयं तय करना होगा, लेकिन इसे मनमाने ढंग से लागू नहीं किया जा सकेगा। विद्यालयों को शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में समिति को प्रस्तावित फीस की जानकारी देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही तय फीस को कम से कम 60 दिन पहले स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करना होगा।
फीस और यूनिफॉर्म को लेकर अहम निर्देश
बैठक में स्पष्ट किया गया कि स्कूल फीस मासिक, त्रैमासिक या छमाही किस्तों में ली जा सकती है।
बिना जिला शुल्क नियामक समिति की पूर्व अनुमति के कोई भी विद्यालय फीस में वृद्धि नहीं कर सकेगा।
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| Ghazipur News |
इसके अलावा कोई भी स्कूल विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म या किताबें किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा।
स्कूल यूनिफॉर्म में कम से कम पांच वर्षों तक बदलाव नहीं किया जाएगा, और यदि परिवर्तन आवश्यक हुआ तो समिति की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
फीस बढ़ोतरी पर सीमा तय
समिति ने स्पष्ट किया कि फीस वृद्धि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) + 5 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
अधिनियम के तहत गठित यह समिति समय-समय पर स्कूलों में जाकर नियमों के अनुपालन की जांच भी कर सकती है।
CA धनंजय तिवारी का बयान
बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक के साथ सीए धनंजय तिवारी भी मौजूद रहे।
वहीं पूर्वांचल समाचार से बातचीत में सीए धनंजय तिवारी ने कहा—
“यह पहल बेहद सराहनीय है। शुल्क अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल अभिभावकों को राहत मिलेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता भी आएगी। यदि नियमों का ईमानदारी से पालन हुआ तो स्कूल और अभिभावकों के बीच विवाद की स्थिति काफी हद तक खत्म हो जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि समिति द्वारा निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। नियमों के स्पष्ट होने से अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा और स्कूलों की जवाबदेही तय होगी।
बैठक के दौरान जिला शुल्क नियामक समिति से जुड़े कई प्रमुख अधिकारी और सदस्य भी उपस्थित दिखाई दिए। इनमें—
- सीए धनंजय तिवारी (चार्टर्ड एकाउंटेंट)
- अधिशासी अभियंता निर्माण खंड प्रथम
- वरिष्ठ कोषाधिकारी
- श्री शिवशंकर दूबे, (अभिभावक) लूदर्स कांवेंट स्कूल
- श्री अरुण कुमार सिंह, (प्रबन्धक) एवर ग्रीन पब्लिक स्कूल
शामिल रहे। सभी सदस्यों ने शुल्क अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने पर सहमति जताई।

