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काशी सहित पूर्वांचल में हर्षोल्लास के साथ मना मकर संक्रांति का पर्व, पतंगों से रंगा आसमान

वाराणसी। काशी सहित पूरे पूर्वांचल में मकर संक्रांति का पर्व  पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह से ही गंगा घाटों प...

वाराणसी। काशी सहित पूरे पूर्वांचल में मकर संक्रांति का पर्व  पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने पवित्र स्नान कर दान-पुण्य किया और भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
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Purvanchal Samachar 

पूर्वांचल में उत्साह और परंपरा के साथ मनाया गया मकर संक्रांति, गंगा घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

काशी के दशाश्वमेध, अस्सी, राजघाट सहित प्रमुख घाटों पर सूर्योदय से ही स्नान-दान का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र और अन्न का दान कर पुण्य अर्जित किया। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

काशी, गाज़ीपुर, जौनपुर, मऊ सहित कई जिलों में स्नान-दान, पूजा और पतंगबाजी का दिखा उल्लास

मकर संक्रांति के अवसर पर पतंगबाजी ने खास आकर्षण खींचा। वाराणसी, गाज़ीपुर, जौनपुर, मऊ, बलिया और चंदौली जैसे जिलों में सुबह से लेकर शाम तक आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सजा रहा। छतों पर बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में पतंग उड़ाने को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। “वो काटा… वो काटा” की आवाज़ों से मोहल्ले गूंजते रहे।

ग्रामीण इलाकों में भी पर्व को पारंपरिक अंदाज में मनाया गया। घर-घर खिचड़ी, दही-चूड़ा, तिलकुट और मिठाइयां बनाई गईं। लोगों ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और आपसी मेल-मिलाप का संदेश दिया। कई स्थानों पर सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया गया।

मकर संक्रांति को सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान और दान से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के चलते भारत में यह पर्व आस्था और परंपरा के संग बड़े उल्लास से मनाया गया।