Varanasi News: धर्मनगरी काशी में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर खौफ का माहौल बनाकर बड़ी ठगी को अंजाम दिया है। ताजा मामला सिगरा थाना क्षेत्र ...
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| Purvanchal Samachar |
आधार कार्ड और मनी लॉन्ड्रिंग का दिखाया डर
घटना की शुरुआत चंदुआ छित्तूपुर स्थित मेडिकल कॉलोनी से हुई। यहाँ रहने वाले डॉ. चंदन किशोर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके पिता रघुनंदन प्रसाद (सेवानिवृत्त रेलकर्मी) के पास 25 दिसंबर को एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को कानून का रखवाला बताया और दावा किया कि रघुनंदन के आधार कार्ड का उपयोग कर एक संदिग्ध मोबाइल सिम लिया गया है, जिसके जरिए करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग की गई है।
वीडियो कॉल पर 'खाकी' और 'कोर्ट' का फर्जीवाड़ा
ठगों ने रघुनंदन प्रसाद को पूरी तरह से डराने के लिए हाईटेक तरीका अपनाया। वीडियो कॉल के दौरान ठग पुलिस की वर्दी पहनकर एक सेटअप रूम में बैठे थे, जो बिल्कुल थाने जैसा लग रहा था। इतना ही नहीं, बुजुर्ग को विश्वास दिलाने के लिए अपराधियों ने फर्जी एफआईआर की कॉपी भेजी और एक शख्स को 'जज' बनाकर भी उनसे बात कराई।
गिरफ्तारी का इतना भारी दबाव बनाया गया कि रघुनंदन प्रसाद को लगा कि वे सचमुच कानून की हिरासत (Digital Arrest) में हैं। ठगों ने उन्हें चेतावनी दी कि जांच पूरी होने तक वे किसी से भी संपर्क न करें, वरना तुरंत जेल भेज दिया जाएगा।
जांच के नाम पर बैंक खाते कराए खाली
पूरे नाटक के दौरान अपराधियों ने 'खातों की सरकारी जांच' का बहाना बनाया। घबराहट में आकर सेवानिवृत्त रेलकर्मी ने ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में कुल 23 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब काफी समय बाद भी कोई संपर्क नहीं हुआ और परिवार को संदेह हुआ, तब जाकर ठगी का एहसास हुआ।
पुलिस की कार्रवाई जारी
सिगरा थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए धोखाधड़ी और साइबर अपराध की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस उन संदिग्ध बैंक खातों की पहचान कर रही है जिनमें रकम ट्रांसफर की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि कुछ खातों को फ्रीज कर दिया गया है और पैसे वापस लाने की प्रक्रिया जारी है।
