गाजीपुर। जनपद में साइबर अपराधियों के मकड़जाल के खिलाफ पुलिस का 'विशेष अभियान' रंग लाने लगा है। ताज़ा मामला नगसर हाल्ट थाने का है, जह...
गाजीपुर। जनपद में साइबर अपराधियों के मकड़जाल के खिलाफ पुलिस का 'विशेष अभियान' रंग लाने लगा है। ताज़ा मामला नगसर हाल्ट थाने का है, जहाँ साइबर हेल्प डेस्क की मुस्तैदी ने एक ग्रामीण के खून-पसीने की कमाई को डूबने से बचा लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी के 15,948 रुपये फ्रीज कराकर पीड़ित को वापस दिला दिए हैं, जिससे महकमे की तकनीक और सतर्कता की जमकर सराहना हो रही है।
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| Purvanchal Samachar |
आंगनवाड़ी योजना के नाम पर बुना था जाल
घटना थाना नगसर हाल्ट के सरहुला गांव की है। यहाँ के निवासी अरविंद कुमार को एक शातिर ठग ने फोन कर खुद को आंगनवाड़ी विभाग से जुड़ा बताया। ठग ने उनकी बहन की डिलीवरी की सरकारी धनराशि दिलाने का झांसा देकर एक फर्जी लिंक भेजा। जैसे ही अरविंद ने उस लिंक पर क्लिक किया, उनके खाते से तीन किस्तों में कुल 16,300 रुपये साफ हो गए।
1930 और पुलिस की जुगलबंदी से मिली सफलता
धोखाधड़ी का एहसास होते ही अरविंद ने थाने की साइबर हेल्प डेस्क को सूचना दी। थानाध्यक्ष ओमप्रकाश के नेतृत्व में टीम ने बिना वक्त गंवाए हेल्पलाइन 1930 और NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज की। बैंक से समन्वय स्थापित कर पुलिस ने तकनीकी घेराबंदी की और न्यायालय के आदेश पर 15,948 रुपये की राशि वापस पीड़ित के खाते में ट्रांसफर करा दी।
संपादकीय टिप्पणी
साइबर अपराध के इस दौर में पुलिस की यह सफलता 'अंधेरे में उम्मीद की किरण' जैसी है। अक्सर देखा जाता है कि लोग ठगी के बाद लोक-लाज या जानकारी के अभाव में शिकायत नहीं करते, जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं। गाजीपुर एसपी के निर्देशन में चल रहा यह अभियान साबित करता है कि अगर समय पर (Golden Hour) सूचना दी जाए, तो पुलिस अपराधियों के डिजिटल पदचिन्हों को ट्रैक कर पैसा वापस दिला सकती है।
