वाराणसी (ब्यूरो)। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी एक बार फिर वैश्विक साहित्य के समागम की साक्षी बनने जा रही है। कविताम्बरा, विश्व हिन्दी शोध ...
वाराणसी (ब्यूरो)। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी एक बार फिर वैश्विक साहित्य के समागम की साक्षी बनने जा रही है। कविताम्बरा, विश्व हिन्दी शोध संवर्धन अकादमी और लोकभाषा अनुसंधान केंद्र के साझा प्रयास से आगामी 22 और 23 फरवरी को दो दिवसीय 'अंतरराष्ट्रीय काशी काव्य कुंभ' का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में साहित्य के दिग्गजों के साथ-साथ आधुनिक हिंदी साहित्य की राष्ट्रीय चेतना पर गंभीर मंथन होगा।
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| Purvanchal Samachar |
प्रथम सत्र: राष्ट्रीय चेतना और कृतियों का लोकार्पण
आयोजन के प्रथम दिन, यानी 22 फरवरी को सुबह 10 बजे से दुर्गाकुंड स्थित श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय परिसर में वैचारिक गोष्ठी का आयोजन होगा। मुख्य विषय 'आधुनिक हिन्दी साहित्य में राष्ट्रीय चेतना' रखा गया है। इस दौरान पंडित हीरालाल मिश्र ‘मधुकर’ की चर्चित कृति ‘वैदिक साहित्य में राम कथा’ और ‘नई सदी के स्वर (भाग-5)’ का लोकार्पण होगा। साथ ही कविताम्बरा के दो विशिष्ट अंकों का विमोचन और लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान समारोह भी संपन्न होगा।
द्वितीय सत्र: बाबतपुर में गूंजेंगे अंतरराष्ट्रीय कवियों के स्वर
काव्य कुंभ के दूसरे दिन, 23 फरवरी को साहित्य की धारा बाबतपुर की ओर बहेगी। सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल के परिसर में सुबह 11 बजे से अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है। इसमें देश-विदेश के जाने-माने कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। आयोजकों के अनुसार, इस समागम का उद्देश्य नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य की समृद्ध विरासत से जोड़ना और लोकभाषाओं के संवर्धन को बल देना है।
