गाजीपुर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) अपनी साख और कार्यप्रणाली को पूरी तरह हाईटेक बनाने की तैयारी में है। Purvanchal Sam...
गाजीपुर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) अपनी साख और कार्यप्रणाली को पूरी तरह हाईटेक बनाने की तैयारी में है।
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| Purvanchal Samachar |
वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के बाद, उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की पुरानी और सुस्त व्यवस्था को अलविदा कह दिया जाएगा। बोर्ड अब 'हाइब्रिड इवैल्यूएशन' मॉडल अपनाने जा रहा है, जिससे रिजल्ट घोषित होने का इंतज़ार अब हफ्तों नहीं, बल्कि चंद दिनों का रह जाएगा।
क्या है बोर्ड का नया 'सुपरफास्ट' प्लान?
अब तक की व्यवस्था में परीक्षक कॉपियां जांचने के बाद 'अवार्ड ब्लैंक' पर अंक दर्ज करते थे, जिसे बाद में बोर्ड के मुख्यालय भेजा जाता था। इस प्रक्रिया में मानवीय गलतियों और समय की भारी बर्बादी होती थी। लेकिन नए बदलाव के तहत: परीक्षक अवार्ड ब्लैंक पर अंक दर्ज करने के साथ-साथ बोर्ड के आधिकारिक पोर्टल पर रियल-टाइम (Online) नंबर फीड करेंगे। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने इस मॉडल का सफल ट्रायल 2025 की प्रैक्टिकल परीक्षाओं में पहले ही कर लिया है।
लिखित परीक्षा में इसे लागू करने से डेटा प्रोसेसिंग की गति कई गुना बढ़ जाएगी।
गाजीपुर में 1.37 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर
इस नई व्यवस्था का सीधा असर गाजीपुर जिले के उन 1,37,456 छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा जो इस साल बोर्ड परीक्षा में बैठ रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) प्रकाश सिंह के अनुसार:
- हाईस्कूल: 66,449 परीक्षार्थी
- इंटरमीडिएट: 70,958 परीक्षार्थी
प्रशासन का कहना है कि बोर्ड के निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा ताकि जिले के किसी भी मेधावी छात्र का परिणाम तकनीकी कारणों से न अटके।
शिक्षकों के लिए 'डिजिटल ट्रेनिंग' का दौर
चूंकि यह व्यवस्था पहली बार लागू हो रही है, इसलिए बोर्ड उन परीक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देने जा रहा है जो ऑनलाइन अंक अपलोड करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य 'जीरो एरर' (Zero Error) रिजल्ट सुनिश्चित करना है। शिक्षकों को सिखाया जाएगा कि कैसे बिना किसी त्रुटि के पोर्टल का उपयोग करना है, ताकि किसी भी छात्र के अंक गलत दर्ज न हों।
