वाराणसी। सूचना क्रांति के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की विश्वसनीयता अब कानूनी कठघरे में है। वाराणसी के सारनाथ (तिलमापुर) निवासी सम...
वाराणसी। सूचना क्रांति के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की विश्वसनीयता अब कानूनी कठघरे में है। वाराणसी के सारनाथ (तिलमापुर) निवासी समाजसेवी नागेश्वर मिश्र ने अमेरिकी टेक दिग्गज मेटा एआई (Meta AI) के विरुद्ध अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय की अदालत में प्रकीर्ण वाद दाखिल किया है। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सारनाथ थाने से रिपोर्ट तलब की है। प्रकरण की अगली सुनवाई 16 मार्च को मुकर्रर की गई है।
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| Purvanchal Samachar |
गलत जानकारी और वादाखिलाफी का आरोप
वाद के अनुसार, नागेश्वर मिश्र ने मेटा एआई से कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं। भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह कब हुआ था, लेकिन प्लेटफॉर्म ने त्रुटिपूर्ण तथ्य पेश किए। जब उन्होंने एआई को गलती सुधारने की चेतावनी दी, तो सिस्टम ने लिखित रूप में माफी मांगते हुए भविष्य में सही जानकारी देने का भरोसा दिया। आरोप है कि दोबारा प्रश्न पूछने पर एआई ने फिर वही गलती दोहराई। क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता ने धारा 173 (4) के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
