सहारनपुर। प्रतिभा किसी डिग्री की मोहताज नहीं होती, इसे सच कर दिखाया है यूपी की सहारनपुर के अहमद बाग की रहने वाली हर्षिता अरोड़ा ने। महज 8व...
सहारनपुर। प्रतिभा किसी डिग्री की मोहताज नहीं होती, इसे सच कर दिखाया है यूपी की सहारनपुर के अहमद बाग की रहने वाली हर्षिता अरोड़ा ने। महज 8वीं तक स्कूली शिक्षा पाने वाली इस बेटी ने सात समंदर पार अमेरिका में वह मुकाम हासिल किया है, जिसे बड़े-बड़े डिग्रीधारी सपना मानते हैं। हर्षिता को दुनिया की दिग्गज स्टार्टअप इन्वेस्टर कंपनी 'वाई कॉम्बिनेटर' (Y Combinator) का सबसे कम उम्र का जनरल पार्टनर बनाया गया है। कभी जिस कंपनी से फंड मांगने गई थीं, आज उसी कंपनी में यह तय करेंगी कि किस स्टार्टअप को निवेश देना है।
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| Harshita Arora |
8वीं बाद छोड़ी पढ़ाई, कोडिंग को बनाया अपना हथियार
हर्षिता के पिता रविन्द्र सिंह अरोड़ा बताते हैं कि जब उनकी बेटी ने महज 8वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ी, तो समाज और परिवार के दबाव के बीच वे सहम गए थे। लेकिन हर्षिता के आईटी प्रेम को देखते हुए उन्होंने उस पर पढ़ाई का दबाव नहीं डाला। हर्षिता ने खुद को कोडिंग और टेक्नोलॉजी में झोंक दिया। बेंगलुरु में इंटर्नशिप के बाद सीधे एमआईटी (MIT) बोस्टन पहुंचीं और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
16 साल की उम्र में बनाया ऐप, PM मोदी भी कर चुके हैं सम्मानित
साल 2018 में महज 16 साल की उम्र में हर्षिता ने 'क्रिप्टो प्राइज ट्रैकर' ऐप बनाकर दुनिया को चौंका दिया था। इसे एप्पल (Apple) ने अपने स्टोर पर फीचर किया। 40 से अधिक देशों में पसंद किए गए इस ऐप को बाद में एक बड़ी कंपनी ने करीब 20000 डॉलर में खरीदा। उनकी इस बुद्धिमत्ता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके बाद उन्होंने अमेरिका में अपनी कंपनी शुरू की, जिसकी वैल्यूएशन आज 6,700 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
Purvanchal Samachar (प्रेरणा डायरी):
सहारनपुर जैसे छोटे शहर से निकलकर दुनिया की सबसे बड़ी स्टार्टअप मेंटॉर कंपनी 'Y Combinator' के शीर्ष पर बैठना कोई मामूली बात नहीं है। यह उन माता-पिता के लिए भी एक सबक है जो बच्चों की नैसर्गिक प्रतिभा को नजरअंदाज कर उन पर औपचारिक शिक्षा का बोझ लादते हैं।
हर्षिता आज उन करोड़ों युवाओं के लिए 'आइकन' हैं जो अपनी शर्तों पर दुनिया जीतना चाहते हैं।
