Mau News: उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत कार्यरत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का धैर्य आखिरका...
Mau News: उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत कार्यरत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। अल्प मानदेय और अत्यधिक कार्यभार के विरोध में शुक्रवार दोपहर करीब 1:30 बजे फतेहपुर मंडाव विकासखंड की सैकड़ों समूह सखियां, बैंक सखियां, स्वास्थ्य सखियां और कृषि सखियां एकजुट होकर जिला कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचीं और अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। महिलाओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजकर न्याय की गुहार लगाई।
अत्यधिक कार्यभार और अल्प मानदेय से आक्रोश
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने बताया कि जमीनी स्तर पर वे समूह की नियमित बैठकें कराने, ब्लॉक स्तरीय बैठकों में प्रतिभाग करने, समूहों का बैंक सीसीएल (CCL) लोन स्वीकृत कराने और लोन रिकवरी कराने जैसे कई चुनौतीपूर्ण कार्य करती हैं। इसके अतिरिक्त, सरकारी रैलियों और शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर डाल दी जाती है।
महिलाओं का कहना था कि वर्तमान में उन्हें महज 2,000 से 4,000 रुपये का मामूली मानदेय दिया जा रहा है, जिससे इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में काम करना और परिवार चलाना पूरी तरह असंभव हो गया है।
20 हजार मानदेय और 5 लाख के स्वास्थ्य बीमा की मांग
कलेक्ट्रेट में सौंपे गए मांग-पत्र में एनआरएलएम कर्मियों ने अपनी प्रमुख मांगों को रेखांकित किया:
- मानदेय वृद्धि: मासिक मानदेय को 2,000-4,000 रुपये से बढ़ाकर सम्मानजनक रूप से न्यूनतम 20,000 रुपये प्रति माह किया जाए।
- संसाधन व भत्ते: डिजिटल कार्यों के लिए स्मार्ट फोन या टैबलेट उपलब्ध कराए जाएं तथा अनिवार्य मोबाइल रिचार्ज भत्ता दिया जाए।
- सीधा भुगतान: सभी कर्मियों का मानदेय बिना किसी कटौती के सीधे उनके व्यक्तिगत बैंक खातों में भेजा जाए।
- सामाजिक सुरक्षा व स्थायीकरण: आयुष्मान अथवा कैशलेस व्यवस्था के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाए और सभी अस्थायी कर्मियों को सेवा सुरक्षा देते हुए स्थायी किया जाए।
प्रदर्शन में रीमा, शकुंतला, कुसुम, सरिता समेत सैकड़ों की संख्या में समूह से जुड़ी महिलाएं उपस्थित रहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन स्तर से जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगी।
