मऊ: जनपद के रैकवारडीह गांव में चल रही चकबंदी प्रक्रिया को लेकर उपजा आक्रोश मंगलवार को सड़क पर दिखाई दिया। प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और...
मऊ: जनपद के रैकवारडीह गांव में चल रही चकबंदी प्रक्रिया को लेकर उपजा आक्रोश मंगलवार को सड़क पर दिखाई दिया। प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए किसानों ने चकबंदी प्रक्रिया को पूरी तरह दोषपूर्ण करार दिया और इसे तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
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| Purvanchal Samachar |
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने स्पष्ट किया कि चकबंदी के दौरान किए गए पैमाइश व चक आवंटन में व्यापक धांधली हुई है, जिससे गांव का आम काश्तकार कतई सहमत नहीं है।
किसानों ने मांग की कि नियम विरुद्ध तरीके से संचालित इस पूरी चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त कर गांव को पुनः उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 6A के दायरे में लाया जाए। इसके साथ ही किसानों ने यह भी साफ किया कि वे विभाग के कर्मचारियों के वेतन या भुगतान को रोकने के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि उनका विरोध केवल और केवल गलत व पक्षपातपूर्ण ढंग से की जा रही चकबंदी प्रक्रिया से है।
अवैध वसूली का आरोप, निष्पक्ष अधिकारी से जांच की मांग
ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दिनेश बहादुर सिंह नामक व्यक्ति गांव में खुलेआम अवैध धनउगाही कर चकबंदी प्रक्रिया को प्रभावित करने में जुटा है। किसानों का यह भी आरोप है कि मामले की जांच का जिम्मा उन्हीं चकबंदी अधिकारियों को सौंपा गया है, जिन पर ग्रामीण शुरुआत से भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने किसी स्वतंत्र, सक्षम और निष्पक्ष प्रशासनिक अधिकारी से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग उठाई है।
