वाराणसी, पूर्वांचल समाचार: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) स्थित भारत अध्ययन केंद्र में हिमालय परिवार काशी क्षेत्र की बीएचयू इकाई द्वारा ...
वाराणसी, पूर्वांचल समाचार: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) स्थित भारत अध्ययन केंद्र में हिमालय परिवार काशी क्षेत्र की बीएचयू इकाई द्वारा 'कैलाश मानसरोवर मुक्ति पखवाड़ा 2026' के के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी एवं समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम हिमालय परिवार के संस्थापक एवं वरिष्ठ प्रचारक डॉ. इंद्रेश कुमार तथा राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. निलेश के पावन मार्गदर्शन में क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर शशिकांत मिश्रा एवं क्षेत्रीय महामंत्री मुकेश पाण्डेय के कुशल नेतृत्व में हुआ। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ विद्वानों और प्रबुद्धजनों ने कैलाश मानसरोवर की पावन भूमि को मुक्त कराने के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
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| Purvanchal Samachar |
कैलाश मानसरोवर मुक्ति के संकल्प को जीवंत बनाने पर क्षेत्रीय महामंत्री मुकेश पाण्डेय का जोर
बैठक को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय महामंत्री मुकेश पाण्डेय ने अभियान की रूपरेखा और इसके राष्ट्रीय महत्व को प्रमुखता से रेखांकित किया।
मुकेश पाण्डेय ने कहा कि कैलाश मानसरोवर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अस्मिता का प्रतीक है। उन्होंने संगठन के कार्यकर्ताओं और युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि इस मुक्ति पखवाड़े के माध्यम से जन-जन की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने जोर दिया कि समाज के हर वर्ग को इस राष्ट्रीय संकल्प से जोड़कर इसे एक व्यापक जनांदोलन का रूप दिया जाएगा, ताकि सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा के प्रति युवा पीढ़ी जागरूक और संकल्पबद्ध हो सके।
भारत अध्ययन केंद्र में जुटे काशी के प्रबुद्धजन और वरिष्ठ अधिकारी
इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केंद्र के वरिष्ठ पदाधिकारियों, आचार्यों और विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रोफेसर ज्ञानेंद्र राय, विभागाध्यक्ष एवं समन्वयक प्रोफेसर शरदेंदु तिवारी, डॉ. अमित तिवारी, डॉ. वंदना सिंह तथा पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) वाराणसी के प्रबंधक श्री रवींद्र तिवारी मुख्य विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा भारत अध्ययन केंद्र के दिनेश सिंह, आशुतोष, कर्मवीर सहित अनेक कार्यकर्ता और शोधार्थी उपस्थित रहे। उपस्थित सभी विद्वानों ने एक स्वर में अभियान के उद्देश्यों की सराहना करते हुए इसे निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
