मऊ: उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले मंगलवार को दर्जनों आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों और ज्वलंत समस्याओं को लेकर मऊ कलेक्...
मऊ: उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले मंगलवार को दर्जनों आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों और ज्वलंत समस्याओं को लेकर मऊ कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया। प्रदर्शनकारी आशा बहुओं ने शासन से मांग की है कि स्वास्थ्य मंत्री और मिशन निदेशक के साथ पूर्व में हुए समझौतों व आश्वासनों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
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| Purvanchal Samachar |
नेताओं पर दर्ज एफआईआर रद्द करने और बकाए भुगतान की पुरजोर मांग
ज्ञापन के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही, सहसचिव देवानंद, राजेश सिंह, कार्यकारिणी सदस्य कमला गौतम तथा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार व भानु के खिलाफ दर्ज कथित फर्जी मुकदमे को अविलंब निरस्त करने की मांग उठाई।
उल्लेखनीय है कि यह एफआईआर लखनऊ कमिश्नरेट के आलमबाग थाने में दर्ज की गई थी। इसके साथ ही आशा कार्यकर्ताओं ने मांग की कि जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) और टीवीआई समेत अन्य मदों में वर्षों से लंबित प्रोत्साहन राशि का पारदर्शी भुगतान दीपावली से पहले किया जाए और सभी वित्तीय ब्योरों को सार्वजनिक किया जाए।
मातृत्व अवकाश, मानदेय में ₹4,500 की वृद्धि और साप्ताहिक छुट्टी की मांग
प्रदर्शनकारियों ने 7 फरवरी को स्वास्थ्य मंत्री के साथ बनी सहमति और 23 अक्टूबर को मिशन निदेशक द्वारा दिए गए आश्वासन को धरातल पर उतारने की मांग रखी।
प्रमुख मांगों का विवरण:
- अंशदान व प्रोत्साहन: राज्य सरकार के बजट से आशा कर्मियों के अंशदान में ₹4,500 की नियमित वृद्धि की जाए तथा प्रोत्साहन राशि में 50 प्रतिशत का इजाफा किया जाए।
- अवकाश व सुविधाएं: आशा कार्यकर्ताओं को वैधानिक मातृत्व अवकाश, साप्ताहिक अवकाश और प्रमुख त्योहारों पर सवेतन अवकाश प्रदान किया जाए।
गांवों में टीकाकरण के लिए मिले कमरा, पंचायत भवनों में बने व्यवस्था
कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर कार्य करने के दौरान आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों का उल्लेख करते हुए कार्यस्थल की व्यवस्था सुधारने पर बल दिया।
उन्होंने मांग की कि प्रदेश के प्रत्येक राजस्व गांव में आशा, संगिनी और एएनएम को नियमित टीकाकरण व अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए एक सुसज्जित कमरा आवंटित किया जाए। जब तक स्वास्थ्य उपकेंद्रों या स्वतंत्र भवनों का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्थानीय ग्राम पंचायत भवनों में तुरंत एक कमरा आरक्षित कर स्वास्थ्य कर्मियों को उपलब्ध कराया जाए।
