Varanasi News: वाराणसी के सिगरा स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में चल रही त्रिदिवसीय 'संस्कृति संसद' के दूसरे दिन संतों और...
Varanasi News: वाराणसी के सिगरा स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में चल रही त्रिदिवसीय 'संस्कृति संसद' के दूसरे दिन संतों और धर्माचार्यों ने हिंदू धर्म व परंपराओं के संरक्षण पर खुलकर विचार रखे। संसद के दूसरे दिन सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने हिंदू मंदिरों और मठों पर सरकारी नियंत्रण को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के संवर्धन के लिए देश भर के मठ-मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर उनका दायित्व सनातनियों को सौंपा जाना चाहिए।
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| Purvanchal Samachar |
मंदिरों के धन से बने गुरुकुल, गौशाला और संस्कारशाला: शंकराचार्य
शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने धार्मिक स्थलों की संपत्ति के सदुपयोग को लेकर ठोस योजना प्रस्तुत की।
उन्होंने कहा कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित धन का उपयोग सनातन परंपरा के पुनरुद्धार में होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इन बड़े धार्मिक स्थलों के कोष से देश भर में आधुनिक गुरुकुलों, विशाल गौशालाओं और संस्कारशालाओं का निर्माण कराया जाना आवश्यक है, जिससे भावी पीढ़ी को सनातन मूल्यों और शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त हो सके।
राम मंदिर के कोष से बने एक लाख विद्यार्थियों के गुरुकुल का लक्ष्य
श्रीराम जन्मभूमि निधि के व्यापक उपयोग पर बल देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि भव्य मंदिर निर्माण के बाद अब सांस्कृतिक नवजागरण का समय है।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सहयोग से कम से कम 1 लाख विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए आवासीय गुरुकुलों की स्थापना का राष्ट्रीय लक्ष्य तय होना चाहिए। इसके साथ ही एक से डेढ़ लाख गोवंश के संरक्षण व संवर्धन के लिए सुव्यवस्थित गौशालाएं स्थापित की जानी चाहिए।
