Varanasi News: बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। रविवार को काशी के केदारघाट स्थित श्रीवि...
Varanasi News: बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। रविवार को काशी के केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में उन्होंने जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में शीश नवाया। जगद्गुरु उस समय मौन व्रत में थे, लेकिन आशीर्वाद के एक इशारे ने अग्निहोत्री के भावी संघर्ष को नई धार दे दी है।
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| Purvanchal Samachar |
इस्तीफे की असली वजह: "चोटी का अपमान और यूजीसी का काला कानून"
मठ के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए अग्निहोत्री ने अपने दिल का गुबार निकाला। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि माघ मेले में जिस तरह ब्राह्मणों के लड़कों की शिखा (चोटी) खींची गई, वह केवल उन बच्चों का नहीं, बल्कि पूरे सनातन धर्म का अपमान था। उन्होंने आरोप लगाया कि पद छोड़ने के बाद उन्हें दबाने के लिए बंधक तक बनाया गया, लेकिन वे झुकने को तैयार नहीं हैं।
इस्तीफे के पीछे 3 वजहें:
1.जगद्गुरु का अपमान: धार्मिक गुरुओं के प्रति प्रशासनिक बेरुखी।
2.धार्मिक प्रतीक: बटुकों की चोटी खींचने की शर्मनाक घटना।
3.UGC रेगुलेशन 2026: शिक्षा और परंपराओं में सरकारी दखल का विरोध।
6 फरवरी को दिल्ली कूच का एलान
पूर्व मजिस्ट्रेट ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा कोई 'भावुक फैसला' नहीं बल्कि एक 'वैचारिक जंग' की शुरुआत है। यदि 6 फरवरी तक केंद्र सरकार एससी-एसटी एक्ट को खत्म करने का फैसला नहीं करती है, तो 7 फरवरी से तो वे दिल्ली की सड़कों पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।
