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गाजीपुर के इस कॉलेज में हस्तलिखित मार्कंडेय पुराण देख दंग रह गए जज साहब, दिया बड़ा सुझाव

गाजीपुर (ब्यूरो)। जनपद के पीजी कॉलेज की लाइब्रेरी अपनी उस अनमोल विरासत के लिए प्रदेश भर में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो शायद ही किसी अन्य ...

गाजीपुर (ब्यूरो)। जनपद के पीजी कॉलेज की लाइब्रेरी अपनी उस अनमोल विरासत के लिए प्रदेश भर में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो शायद ही किसी अन्य डिग्री कॉलेज में देखने को मिले। हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस कुणाल रवि सिंह ने जब इस पुस्तकालय के 'किताबों के संसार' को देखा, तो वह यहां मौजूद पांडुलिपियों की प्राचीनता और संग्रह को देखकर अभिभूत नजर आए।

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पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का दिया सुझाव

कॉलेज में आयोजित एक सेमिनार में शिरकत करने पहुंचे जस्टिस कुणाल रवि सिंह ने विशेष रूप से लाइब्रेरी का दौरा किया। सदियों पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों (Manuscripts) का अवलोकन करते हुए उन्होंने कॉलेज प्रशासन को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि समय के साथ इन बेशकीमती कागजों के खराब होने का खतरा है, इसलिए इनका 'डिजिटलीकरण' अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल यह ज्ञान सुरक्षित होगा, बल्कि इंटरनेट के माध्यम से पूरी दुनिया और आने वाली पीढ़ियां भी इसे पढ़ सकेंगी।


1 लाख से अधिक किताबों और मार्कंडेय पुराण का साथ

अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रविशंकर सिंह के अनुसार, इस पुस्तकालय में 1 लाख से भी ज्यादा किताबों का विशाल संग्रह है। इस खजाने की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ रखा 'मार्कंडेय पुराण' है, जो दुर्लभ हस्तलिखित प्रतियों में से एक है। यहाँ ऐसी कई पुस्तकें हैं जिनका प्रकाशन अब बंद हो चुका है और वे कहीं और मिलना लगभग नामुमकिन हैं।


शोधार्थियों के लिए ज्ञान का महासागर

यह लाइब्रेरी केवल हिंदी या संस्कृत ही नहीं, बल्कि अंग्रेजी और अन्य गंभीर विषयों पर शोध करने वाले छात्रों के लिए एक बड़ा केंद्र बनी हुई है। यहाँ मौजूद वेद-पुराण और दुर्लभ ग्रंथ छात्रों को गहराई से अध्ययन करने के लिए घंटों रुकने पर मजबूर कर देते हैं।