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महा शिवरात्रि: शिव-शक्ति के मिलन का अनुपम पर्व

महा शिवरात्रि , हिंदू धर्म का एक ऐसा पावन पर्व है जो भगवान शिव और देवी मां पार्वती के विवाह का प्रतीक है । यह सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि शिव...

महा शिवरात्रि, हिंदू धर्म का एक ऐसा पावन पर्व है जो भगवान शिव और देवी मां पार्वती के विवाह का प्रतीक है। यह सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि शिव भक्तों के लिए आत्म-चिंतन, ध्यान और शिव की असीम कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाए जाने वाला यह पर्व, शिव और शक्ति के मिलन का महापर्व है, जो जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र का प्रतिनिधित्व करता है।


महा शिवरात्रि का महत्व और पौराणिक कथाएँ

इस पर्व से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं, जो इसके महत्व को और गहरा करती हैं:

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  • शिव-पार्वती विवाह: सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था। यह प्रेम, समर्पण और दैवीय मिलन का प्रतीक है, जो गृहस्थ जीवन की पवित्रता को दर्शाता है।
  • तांडव नृत्य: कुछ मान्यताओं के अनुसार, इस रात भगवान शिव ने 'तांडव' नृत्य किया था, जो सृष्टि के निर्माण, संरक्षण और विनाश का नृत्य है।
  • समुद्र मंथन: एक अन्य कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला था, तब भगवान शिव ने संसार को बचाने के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण किया था। इसी कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए। यह घटना भी महा शिवरात्रि से जुड़ी है, जिसमें शिव के परोपकार और त्याग की भावना को याद किया जाता है।

इन कथाओं के माध्यम से महा शिवरात्रि हमें त्याग, प्रेम, संयम और परोपकार का संदेश देती है।


महा शिवरात्रि की पूजा विधि और अनुष्ठान

महा शिवरात्रि के दिन भक्तगण विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। यह दिन उपवास, जागरण और शिव आराधना के लिए समर्पित होता है:


  • उपवास: भक्तगण निराहार या फलाहार उपवास रखते हैं। कुछ लोग निर्जला उपवास भी करते हैं, जिसका अत्यधिक महत्व माना जाता है।
  • स्नान और शुद्धिकरण: सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं।
  • शिवलिंग पर अभिषेक: शिव मंदिरों में जाकर या घर पर शिवलिंग स्थापित कर उसका अभिषेक किया जाता है। इसमें जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और गन्ने का रस का प्रयोग होता है।
  • बेलपत्र और धतूरा: भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत, चंदन, पुष्प और फल अर्पित किए जाते हैं। ये वस्तुएँ भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं।


  • मंत्र जाप: "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप इस दिन बहुत फलदायी माना जाता है। रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करना शुभ होता है।
  • रात भर जागरण: भक्त रात भर जागरण कर भजन-कीर्तन करते हैं और शिव चालीसा, शिव स्तोत्र का पाठ करते हैं।
  • यह पूजा चार प्रहर में की जाती है, जिसका प्रत्येक प्रहर विशेष महत्व रखता है।
  • महा शिवरात्रि: आधुनिक जीवन में इसका महत्व

आज के आधुनिक युग में भी महा शिवरात्रि का महत्व कम नहीं हुआ है। यह हमें भौतिकवादी जीवन से हटकर आध्यात्मिक शांति और आंतरिक शुद्धि की ओर ले जाने का अवसर प्रदान करता है। उपवास और ध्यान से मन को एकाग्र करने में मदद मिलती है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह हमें प्रकृति से जुड़ने और अपनी जड़ों को समझने का भी एक मौका देता है।


महा शिवरात्रि केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने और आत्म-साक्षात्कार की ओर बढ़ने का एक मार्ग है। भगवान शिव की महिमा अपरंपार है, और इस विशेष दिन उनकी आराधना से सभी मनोरथ पूरे होते हैं।

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