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वाराणसी: मसाने की होली पर बढ़ा विवाद, विद्वत परिषद के बाद डोम राजा परिवार भी उतरा विरोध में

वाराणसी (ब्यूरो)। मोक्षदायिनी काशी में महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर आयोजित होने वाली 'मसाने की होली' को लेकर विवाद अब गहराता जा रहा ...

वाराणसी (ब्यूरो)। मोक्षदायिनी काशी में महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर आयोजित होने वाली 'मसाने की होली' को लेकर विवाद अब गहराता जा रहा है। काशी विद्वत परिषद द्वारा इस आयोजन पर आपत्ति जताए जाने के बाद अब मणिकर्णिका घाट के संरक्षणकर्ता और डोम राजा परिवार ने भी मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को डोम राजा परिवार के सदस्यों ने जिलाधिकारी (DM) और पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर इस आयोजन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
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शोक और मोक्ष की मर्यादा का हवाला

डोम राजा परिवार का तर्क है कि मणिकर्णिका घाट अनादि काल से मोक्ष की स्थली रही है। यहाँ चौबीसों घंटे शवों का दाह-संस्कार होता है और यह स्थान शोक व वैराग्य का प्रतीक है। डोम राजा परिवार के मुताबिक, घाट पर डीजे बजाना और हुड़दंग करना श्मशान की गरिमा और धार्मिक मर्यादाओं के विरुद्ध है। उनका कहना है कि चिता भस्म से होली खेलने के नाम पर जो आयोजन हो रहा है, वह मूल परंपरा का हिस्सा नहीं बल्कि उसे 'इवेंट' का रूप दिया जा रहा है।

RTI के खुलासे से मची हलचल

इस विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब कुछ समाजसेवियों ने सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए प्राप्त जानकारी के आधार पर बड़ा दावा किया। समाजसेवियों का आरोप है कि इस आयोजन के नाम पर होने वाली गतिविधियां न तो प्राचीन परंपराओं में दर्ज हैं और न ही इसे लेकर कोई अधिकृत प्रशासनिक नियमावली स्पष्ट है। ज्ञापन के जरिए प्रशासन को आगाह किया गया है कि यदि इस पर रोक नहीं लगी, तो यह घाट की शुचिता को स्थायी नुकसान पहुँचा सकता है।