वाराणसी। काशी की गलियों में जब तक ठिठोली न हो, तब तक काशी का रंग अधूरा रहता है। इस बार वाराणसी का प्रसिद्ध 'महामूर्ख सम्मेलन' केवल ...
वाराणसी। काशी की गलियों में जब तक ठिठोली न हो, तब तक काशी का रंग अधूरा रहता है। इस बार वाराणसी का प्रसिद्ध 'महामूर्ख सम्मेलन' केवल 😊हंसी-ठिठोली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर मचे घमासान—अमेरिका-ईरान युद्ध और गहराते तेल संकट पर भी करारा प्रहार करेगा। आयोजन समिति के मुताबिक, इस महाकुंभ में 10 हजार से ज्यादा 'महामूर्खों' की भीड़ जुटने की उम्मीद है, जहाँ देश की ज्वलंत समस्याओं को हास्य के पुट के साथ परोसा जाएगा। देश अलग-अलग राज्यों से होगा कवियों का जमावड़ा।
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| Purvanchal Samachar |
अगड़म-बगड़म मंत्र और बेमेल शादी का तड़का
इस बार सम्मेलन का मुख्य आकर्षण 'बेमेल शादी' होगी, जिसमें दूल्हा-दुल्हन के अनोखे जोड़े को 'अगड़म-बगड़म' मंत्रों के बीच निकाह भी पढ़ाया जाएगा। परंपरा और आधुनिकता के इस अजीबोगरीब मेल को देखने के लिए शहर के खास-ओ-आम उत्साहित हैं। व्यंग्य के जरिए समाज और सियासत की विसंगतियों पर चोट करने की यह परंपरा काशी की अपनी मौलिक पहचान है।
प्रताप फौजदार की लाफ्टर डोज से गुदगुदाएगी काशी
मंच पर ठहाकों की गूंज तब और तेज होगी, जब दिल्ली के मशहूर हास्य कलाकार और लाफ्टर चैलेंज फेम सरदार प्रताप फौजदार अपनी चिर-परिचित शैली में कविता पाठ करेंगे। कवियों की फौज इस बार अंतरराष्ट्रीय संकटों को बनारसी लहजे में पिरोकर जनता के सामने रखेगी। तेल की बढ़ती कीमतों और युद्ध के उन्माद को जिस तरह यहाँ 'मूर्खता' के चश्मे से देखा जाएगा, वह निश्चित रूप से चिंतन और मनोरंजन का अनूठा संगम होगा।
