गाजीपुर (ब्यूरो)। पुलिस का नाम सुनते ही जहां आम तौर पर आम जनता के मन में हिचक पैदा होती है, वहीं गाजीपुर पुलिस की एक अनूठी पहल ने युवाओं की...
गाजीपुर (ब्यूरो)। पुलिस का नाम सुनते ही जहां आम तौर पर आम जनता के मन में हिचक पैदा होती है, वहीं गाजीपुर पुलिस की एक अनूठी पहल ने युवाओं की सोच को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। सोमवार को पुलिस लाइन सभागार में 'स्टूडेंट पुलिस एक्सपीरिएंशियल लर्निंग' (SPEL) प्रोग्राम की समीक्षा बैठक हुई, जिसमें खुद प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) एल. वी. एंटनी देव कुमार ने छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया। इस दौरान छात्रों ने पुलिस भर्ती से लेकर कार्य के दबाव और चुनौतियों पर बेबाकी से सवाल पूछे, जिनका अधिकारियों ने विस्तार से जवाब दिया।
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| Purvanchal Samachar |
30 दिनों की पाठशाला: थानों से लेकर साइबर सेल तक की समझ
30 दिवसीय इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के 5 महाविद्यालयों के 50 चुनिंदा छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। इन छात्रों ने केवल किताबों में नहीं, बल्कि जमीन पर पुलिसिंग को समझा। कार्यक्रम के तहत 20 दिन थानों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 6 दिन विभिन्न विशेष शाखाओं का भ्रमण हुआ। छात्रों को अपराध अनुसंधान, साइबर क्राइम, महिला सुरक्षा और यातायात नियंत्रण जैसे पेचीदा विषयों की बारीकियां समझाई गईं। कोतवाली से लेकर सैदपुर और मुहम्मदाबाद जैसे थानों में छात्रों ने खाकी की कार्यप्रणाली को करीब से देखा।
भ्रांतियां हुईं दूर, प्रमाण पत्र पाकर खिले चेहरे
समापन के अवसर पर छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए स्वीकार किया कि पहले उनके मन में पुलिस की छवि को लेकर कई गलत धारणाएं थीं, लेकिन इस संवाद और प्रशिक्षण ने उनकी सोच में सकारात्मक बदलाव लाया है। एसपी डॉ. ईरज राजा और एएसपी सिटी डॉ. राकेश कुमार मिश्र की मौजूदगी में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। डीजीपी ने युवाओं को उत्तर प्रदेश पुलिस की पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उन्हें खाकी पहनकर जनसेवा करने के लिए प्रेरित किया।
