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गाजीपुर: पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र 'गाजीपुर गौरव' से सम्मानित, साहित्य चेतना समाज का भव्य आयोजन

गाजीपुर (ब्यूरो)। जनपद की प्रतिष्ठित संस्था ' साहित्य चेतना समाज ' के तत्वावधान में रविवार को 41वां वार्षिक पुरस्कार वितरण एवं '...

गाजीपुर (ब्यूरो)। जनपद की प्रतिष्ठित संस्था 'साहित्य चेतना समाज' के तत्वावधान में रविवार को 41वां वार्षिक पुरस्कार वितरण एवं 'चेतना महोत्सव-2026' का भव्य आयोजन किया गया। नगर के बंधवा स्थित शहनाई पैलेस में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में जनपद की माटी के लाल और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल श्री कलराज मिश्र को 'गाजीपुर गौरव सम्मान' से अलंकृत किया गया। कार्यक्रम में जिले के तमाम विद्वान, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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सम्मान नहीं, यह जनता का विश्वास है: माननीय कलराज मिश्र


सम्मान ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में माननीय कलराज मिश्र भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, "आज अपनी ही माटी पर 'गाजीपुर गौरव सम्मान' से नवाजा जाना मेरे लिए किसी भी अन्य सम्मान से ऊपर है। सार्वजनिक जीवन में जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी होती है और यह सम्मान उसी अटूट विश्वास का प्रतीक है।" उन्होंने इसे अपने सार्वजनिक जीवन की यात्रा और संगठनात्मक मूल्यों के प्रति एक सार्थक स्वीकृति बताया।

वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और विद्वानों का लगा जमावड़ा


इस प्रेरणादायी आयोजन में जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह,भाजपा जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश राय, पूर्व सांसद राधे मोहन सिंह, भाजपा नेत्री किरण सिंह, विहिप के वरिष्ठ नेता विनोद उपाध्याय, समाजसेवी डॉ. सानंद सिंह समेत जनपद के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, समाज सेवी और विद्वतजन उपस्थित रहे। साहित्य चेतना समाज के सदस्यों ने अतिथियों का स्वागत किया और संस्था के 41 वर्षों के साहित्यिक सफर पर प्रकाश डाला। समारोह के दौरान जिले की अन्य विभूतियों को भी उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।

संपादकीय विश्लेषण:


साहित्य चेतना समाज ने पिछले चार दशकों से गाजीपुर की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का जो बीड़ा उठाया है, वह प्रशंसनीय है। माननीय कलराज मिश्र जैसी कद्दावर शख्सियत को सम्मानित करना न केवल संस्था का कद बढ़ाता है, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा भी देता है। गाजीपुर की धरती हमेशा से विद्वानों और वीरों की रही है, और आज का यह 'चेतना महोत्सव' इसी गौरवशाली परंपरा का जीवंत प्रमाण है।