मुंबई। भारतीय संगीत जगत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। अपनी खनकती आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज गायिका और...
मुंबई। भारतीय संगीत जगत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। अपनी खनकती आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके पुत्र आनंद भोसले ने की है। इस खबर के सामने आते ही पूरी दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है। सोमवार को मुंबई में उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
![]() |
| Purvanchal Samachar |
पीएम मोदी और दिग्गजों ने जताया शोक: 'एक युग का अंत'
आशा ताई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे संगीत जगत की अपूरणीय क्षति बताया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत तमाम दिग्गजों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। राजनीतिक गलियारों से लेकर बॉलीवुड तक, हर आंख आज नम है। उनकी आवाज केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की एक पहचान थी।
इन अमर गीतों से हमेशा जिंदा रहेंगी 'आशा'
आशा भोसले की आवाज में वह जादू था जो हर मिजाज के गानों में जान फूंक देता था। चाहे वह चुलबुलापन हो या गहरा दर्द, उन्होंने हर भाव को सुरों में पिरोया। उनके कुछ यादगार गीत आज भी हर जुबान पर हैं:
- "इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं..." (उमराव जान)
- "दम मारो दम, मिट जाए गम..." (हरे रामा हरे कृष्णा)
- "चुरा लिया है तुमने जो दिल को..." (यादों की बारात)
- "अभी न जाओ छोड़ कर, कि दिल अभी भरा नहीं..." (हम दोनों)
पूर्वांचल समाचार (संपादकीय श्रद्धांजलि):
आशा भोसले केवल एक गायिका नहीं थीं, बल्कि वे संगीत का एक ऐसा इंद्रधनुष थीं जिसमें हर रंग समाहित था। लता दीदी के जाने के बाद वे संगीत प्रेमियों के लिए एक मजबूत सहारा थीं। उनके जाने से जो खालीपन आया है, उसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। जिस सहजता से वे शास्त्रीय संगीत से लेकर पॉप और कैबरे तक गा लेती थीं, वैसा लचीलापन दुनिया के किसी दूसरे गायक में मिलना नामुमकिन है। 'आशा' भले ही चली गई हों, लेकिन उनकी आवाज की 'किरण' आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।
