गाजीपुर ब्यूरो: शारदीय नवरात्रि एवं विजयादशमी के पावन पर्व के उपरांत जनपद गाजीपुर की ऐतिहासिक व सुप्रसिद्ध श्री हरिशंकरी रामलीला कमेटी द्वार...
गाजीपुर ब्यूरो: शारदीय नवरात्रि एवं विजयादशमी के पावन पर्व के उपरांत जनपद गाजीपुर की ऐतिहासिक व सुप्रसिद्ध श्री हरिशंकरी रामलीला कमेटी द्वारा प्रत्येक वर्ष की परंपरा का निर्वहन करते हुए इस वर्ष भी नगर के उत्कृष्ट माँ दुर्गा पूजा पंडालों और प्रतिमाओं को पुरस्कृत व सम्मानित किया गया। जिसमें राज्य सभा सांसद संगीता बलवंत और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्ण बिहारी राय की गरिमामयी उपस्थिति रही।
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| Purvanchal Samachar |
इस भव्य अलंकरण समारोह में नगर के नखास (मारकिनगंज) स्थित 'श्री माता शोकविनाशिनी दुर्गा पूजा समिति' की अलौकिक,अद्वितीय नखास की 'बड़ी महारानी' माँ दुर्गा की प्रतिमा को जनपद में सर्वश्रेष्ठ घोषित करते हुए प्रथम स्थान का पुरस्कार प्रदान किया गया। टेढ़वा रजदेपुर की प्रतिमा दूसरे स्थान पर रही। वहीं, शानदार कलाकारी और दिव्य भाव के लिए सनातनी नवयुवक दुर्गा पूजा समिति जमालपुर को तीसरा स्थान और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था के लिए मिश्र बाजार को सर्वश्रेष्ठ मार्ग सजावट का प्रथम पुरस्कार मिला।
चारों ओर घूमती माँ की जीवंत आँखें बनीं आकर्षण का केंद्र, देखते रह गए श्रद्धालु
नखास की 'बड़ी महारानी' की विशालकाय प्रतिमा इस बार केवल गाजीपुर ही नहीं, बल्कि समूचे पूर्वांचल में श्रद्धा और कौतूहल का सबसे बड़ा केंद्र बनी रही।
प्रतिमा की सबसे अद्वितीय और चमत्कारी विशेषता यह थी कि माँ दुर्गा की आँखें चारों दिशाओं में घूम रही थीं। माँ के नयनों की इस विशेष तकनीक और जीवंत बनावट के कारण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात जगदंबा अपने हर भक्त पर सीधी कृपादृष्टि डाल रही हों। पंडाल में कदम रखते ही भक्त माँ के इस अलौकिक स्वरूप को एकटक निहारते रह जाते थे। बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों का कहना था कि अपने जीवनकाल में उन्होंने गाजीपुर की पावन धरती पर माँ भगवती का इतना सजीव और सम्मोहक स्वरूप पहले कभी नहीं देखा था। सबसे गर्व की बात यह रही कि इस विहंगम प्रतिमा को किसी बाहरी शहर से नहीं, बल्कि गाजीपुर के ही स्थानीय मूर्तिकारों ने अपनी कड़ी मेहनत से आकार दिया था।
माँ की प्रतिमा का जो आंखों पर कार्य किया गया वह नगर के कोट स्थित निवासी लालचंद प्रजापति के द्वारा अद्भुत और सराहनीय कार्य, जो हर कोई तारीफ कर रहा है।
पूर्वांचल समाचार से खास वार्ता: "माँ के आशीर्वाद और भक्तों के प्रेम का परिणाम"
पूर्वांचल समाचार के साथ विशेष बातचीत में श्री माता शोकविनाशिनी दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर अपार हर्ष व्यक्त किया।
अध्यक्ष कमलेश वर्मा ने कहा, "यह प्रथम पुरस्कार समिति के प्रत्येक समर्पित सदस्य, मूर्तिकारों के अथक परिश्रम और सबसे बढ़कर माँ शोकविनासनी की असीम अनुकंपा का सुफल है। हमारा उद्देश्य केवल एक प्रतिमा स्थापित करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को माँ के साक्षात स्वरूप की अनुभूति कराना था। जब भक्तों की आँखों में माँ को देखकर भक्ति के अश्रु और आनंद दिखा, तभी हमारा संकल्प पूरा हो गया था। हरिशंकरी रामलीला कमेटी का यह सम्मान हमें भविष्य में और बेहतर करने की प्रेरणा देगा।"
वही समिति के सदस्य सुभाष पटेल ने बताया कि हम सभी सदस्यों का मेहनत सफल हुआ।
जमालपुर की अष्टभुजा चलायमान प्रतिमा रही तीसरे स्थान पर, लगीं लंबी कतारें
प्रतियोगिता में तीसरे स्थान सनातनी नवयुवक दुर्गा पूजा समिति, जमालपुर की प्रतिमा ने अपने नाम किया।
इस भव्य प्रतिमा को भी गाजीपुर के ही सिद्धहस्त कलाकारों ने तराशा था। जमालपुर की प्रतिमा की मुख्य विशेषता यह रही कि महिषासुर मर्दिनी माँ दुर्गा अपने अष्ट भुजाओं (हाथों) को ऊपर-नीचे चलायमान मुद्रा में उठा रही थीं। नवरात्रि के दौरान इस अद्भुत यांत्रिक व आध्यात्मिक कला को देखने के लिए श्रद्धालुओं का ऐसा हुजूम उमड़ा कि लोगों को दर्शन पाने के लिए घंटों लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
रोड सजावट में मिश्र बाजार रहा अव्वल, सोशल मीडिया पर छाया नखास
नयनाभिराम विद्युत सज्जा (रोड लाइटिंग) के वर्ग में मिश्र बाजार ने बाजी मारते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। मिश्र बाजार के पूरे मार्ग को दूधिया रोशनी, रंग-बिरंगी झालरों और कलात्मक द्वारों से दुल्हन की तरह सजाया गया था, जिसने राहगीरों और दर्शनार्थियों का मन मोह लिया।
दूसरी ओर, नखास की 'बड़ी महारानी' की प्रतिमा का क्रेज युवाओं के सिर चढ़कर बोला। सप्तमी, अष्टमी और विशेष रूप से महानवमी के दिन नखास (मारकिनगंज) पंडाल में भक्तों का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि तिल रखने की जगह नहीं बची। युवाओं ने माँ की घूमती आँखों और भव्य दरबार के साथ जमकर सेल्फी लीं और रील्स बनाईं, जिसके चलते सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नखास की प्रतिमा लगातार कई दिनों तक ट्रेंड करती रही और चर्चा का विषय बनी रही।


